शुक्रवार, 25 सितंबर 2009

अब मिल रही है मुझे मेरी पहचान |


मैं करती रही इंतजार पर आया कोई जवाब लेकिन मिल रहा है मुझको अपना नया नाम और असली पहचान.अब रों मेरी जिन्दगी से चला गया है और हर तरफ मंडरा रहे दुःख वो काले बादल जा रहे हैं और ख़ुशी से भरा हुआ सावन का मौसम अपनी बाहें फैलाये गो़द में लेने के लिए तैयार खडा मेरा इंतजार कर रहा है.पर कभी-कभी मैं अपने पुराने दिनों को सोचती हूँ तो लगता है कि मैंने इन ख़ुशी के दिनों को पाने के लिए कितने मौसम रोते हुए गुजार दिए.उन मौसम में मेरे अपने वो अपने पराये भी मेरे नहीं रहे जिनको मैं अपना कहती थी. वो भी मेरा साथ छोड़ कर चले गए थे.पर आज मैं फिर अपनों के साथ हूँ और जिन परायों की वजह से मैं अपनों का इंतजार कर रही थी मैं आज उन परायों का साथ छोड़ चुकी हूँ. आज मेरी समझ मैं भी गया की अपने और परायों में क्या अंतर है. मैं आज से अपनी नयी जिन्दगी की शुरुआत कर रही हूँ. इस नयी जिन्दगी को शुरू करने में मेरे भाई ने मेरा साथ दिया जो की अब मेरा अपना है.और मेरा भाई आज मेरा ध्यान रख रहा है कि कहीं वो पतझड़ का मौसम फिर से मेरे जीवन में जाये और जो नयी जिन्दगी मिली है उसे ख़त्म कर दे.मैं अपनी जिन्दगी की शुरुआत के समय में आप सभी का साथ और आशीर्वाद चाहती हूँ कि मेरा जीवन हमेशा खुशियों से भरा हो। .......................
यह है मेरी अपनी कहानी मेरी जबानी
प्रीती ओझा| अब मैं कर रही हूँ आपके जवाब का इन्तजार , क्या आप हैं मेरे साथ ?