
आज उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बहुत बड़ा दिन है आज प्रदेश की जनता अपने मत का प्रयोग करके भावी मुख्यमंत्री को चुनेगी और किसको देगी अपने मत से जवाव की क्यों नहीं है वो इस प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के लायक हर पार्टी चाहती है की सरकार उसकी बने पर जनता के मान की कोई नहीं सुनता जब अखलेश यादव की सरकार बनी तो लगा कुछ होगा इस प्रदेश का पर कुछ हुआ तो सही मगर जो मूल भूत सुविधा होनी चाहिए वो नहीं मिली जैसे (रोजगार , विकास , सेफ्टी ) पर नहीं हुई हमारे प्रदेश में ये योजना (लूट बलात्कार चोरी रिश्वत बेरोजगारी टूटी सड़क शाम को 7 बजे के बाद का डर ) आज भी कायम है बहुत ही आशा थी अखलेश यादव जी से की नये है नवयुवक है जवान है कुछ नया करेंगे पर इनको भी देख लिया वही पुराना ढोल हमें ये समझ नहीं आया की हाइवे बनाने से क्या प्रदेश प्रगति कर रहा है की हमने अपने समय में देश का सबसे लम्बा हाइवे बना दिया या हमने लेपटॉप बाटे हमने गरीबो को एक हजार रूपए महीने की पेंशन दी हमने लाखो स्कूल बनवा दिए हमने स्कूलों में अध्यापक की नियुक्ति की और इन सब को करने के बाद यादव जी हार जाते है तो क्या समझ जाये की अपने जो काम किये वो जनता को पसंद नहीं आये नहीं ऐसा करने से कोई आपको याद नहीं करेगा याद उसको किया जाता जिसने इतिहास में कुछ किया हो पर आपकी सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया जो याद किया जा सके एक प्रदेश के मुखिया का कर्त्तव्य होता है की वो सभी प्रदेश के नागरिक को एक डोर में बांध कर चले पर क्या ये हुआ ???????????? ![]() |
अब बात करते है बहिन जी की उनको ये लगता रहा की उनकी मृत्यु के बाद कोई याद रख पायेगा या नहीं इसी सोच में उन्होंने पुरे प्रदेश में मूर्ति ही लगा डाली कुछ नहीं तो उनकी मूर्तियों को देख कर आने वाली जेनरेशन अपने पापा मम्मी से पूछेगी की ये कौन है तो वो बोलेंगी की ये हमारी बहिन जी है और इन्होंने जातिवाद की राजनीति की और हमेशा दो के पीछे रही और उनके लिए ही सोचती रही पर किया अपने मन की चाहे किसी को नुकसान हो रहा हो और हमेशा उनके जन्मदिन पर चौथ बसूली होती थी और जितना रूपया वो अपने जन्मदिन पर खर्च करती थी उतने में सौ लड़कियों की शादी हो जाती पर रुतवा भी तो कायम रखना था हमेशा निराशा ही हाथ लगी उनके राज में ??????????????????????????????????????????????????








