शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

आज उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बहुत बड़ा दिन है आज प्रदेश की जनता अपने मत का प्रयोग करके भावी मुख्यमंत्री को चुनेगी और किसको देगी अपने मत से जवाव की क्यों नहीं है वो इस प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के लायक हर पार्टी चाहती है की सरकार उसकी बने पर जनता के मान की कोई नहीं सुनता जब अखलेश यादव की सरकार बनी तो लगा कुछ होगा इस प्रदेश का पर कुछ हुआ तो सही मगर जो मूल भूत सुविधा होनी चाहिए वो नहीं मिली जैसे (रोजगार , विकास , सेफ्टी ) पर नहीं हुई हमारे प्रदेश में ये योजना (लूट बलात्कार चोरी रिश्वत बेरोजगारी टूटी सड़क शाम को 7 बजे के बाद का डर ) आज भी कायम है बहुत ही आशा थी अखलेश यादव जी से की नये है नवयुवक है जवान है कुछ नया करेंगे पर इनको भी देख लिया वही पुराना ढोल हमें ये समझ नहीं आया की हाइवे बनाने से क्या प्रदेश प्रगति कर रहा है की हमने अपने समय में देश का सबसे लम्बा हाइवे बना दिया या हमने लेपटॉप बाटे हमने गरीबो को एक हजार रूपए महीने की पेंशन दी हमने लाखो स्कूल बनवा दिए हमने स्कूलों में अध्यापक की नियुक्ति की और इन सब को करने के बाद यादव जी हार जाते है तो क्या समझ जाये की अपने जो काम किये वो जनता को पसंद नहीं आये नहीं ऐसा करने से कोई आपको याद नहीं करेगा याद उसको किया जाता जिसने इतिहास में कुछ किया हो पर आपकी सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया जो याद किया जा सके एक प्रदेश के मुखिया का कर्त्तव्य होता है की वो सभी प्रदेश के नागरिक को एक डोर में बांध कर चले पर क्या ये हुआ ???????????? 

अब बात करते है बहिन जी की उनको ये लगता रहा की उनकी मृत्यु के बाद कोई याद रख पायेगा या नहीं इसी सोच में उन्होंने पुरे प्रदेश में मूर्ति ही लगा डाली कुछ नहीं तो उनकी मूर्तियों को देख कर आने वाली जेनरेशन अपने पापा मम्मी से पूछेगी की ये कौन है तो वो बोलेंगी की ये हमारी बहिन जी है और इन्होंने जातिवाद की राजनीति की और हमेशा दो के पीछे रही और उनके लिए ही सोचती रही पर किया अपने मन की चाहे किसी को नुकसान हो रहा हो और हमेशा उनके  जन्मदिन पर चौथ बसूली होती थी और जितना रूपया वो अपने जन्मदिन पर खर्च करती थी उतने में सौ लड़कियों की शादी हो जाती पर रुतवा भी तो कायम रखना था हमेशा निराशा ही हाथ लगी उनके राज में ?????????????????????????????????????????????????? 

अब जनता को सोचना है की कौन है हमारा नेता ???????????????????????????????

शनिवार, 28 फ़रवरी 2015

बदलाव की उम्मीद हर कोई रखता  है पर खुद नहीं बदलता क्यों ?

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2012

BHARAT KE BABA ?????????????????????

हिंदुस्तान हमेशा देवी - देवताओ वाला देश कहा गया है और इस देश के तरह की संस्कृति किसी भी देश में नहीं  मिलती थी और इस देश में आयुर्वेद से जनता का इलाज किया जाता था बेटे का सुबह जागने के बाद सबसे पहला काम हुआ करता था अपने माता -पिता के चरण स्पर्श करना और उनसे आशीर्वाद लेना फिर तेयार होकर विद्यालय  जाना और उधर अपने गुरु की इज्जत  करना ओके उनके दिए हुए उपदेशो का पालन करना और अपने से बड़ो  की इज्जत करना और अपने सभी नियमो का पालन करना और गुरु के बताये हुए आदर्शो को याद रखते हुए अपने जीवन का यापन करना पर  आज तो कुछ और ही नजर आता है अब बेटा सुबह अपने माता -पिता को प्रवचन देता हुआ जगता है और पुरे दिन आवारा गर्दी करता है न तो अपनी और अपनों की इज्जत का ख्याल है और दिन भर जुआ और शराव के नशे में रहता है पता नहीं क्यों अब इतना बदलाव आ रहा है इन्सान में बस इसको तो याद रहता है नशा जो कर रहा है उसका नाश और आज का गुरु भी बदल गया है जो शिक्षा उसको विद्यालय में देनी चाहिये वो नहीं देता और टियुशन के लिए बुला लेता है और अपनी आत्मा को धोखा देता है पर खुश बहुत होता है की इस महीने मेने इतना कमाया क्या शिक्षा अब रुपयों से खरीदी या बेचीं जा सकती है ? यदि हा तो अनपढ़ो की संख्या क्यों ज्यादा है । भारत में कहते है की जिस व्यक्ति का कोई गुरु नहीं है उसका उधार नहीं हो सकता में भी कुछ इस बात से सहमत हूँ पर आज के समय में किसको अपना गुरु बनाये क्योकि गुरु उपदेश देता है जो हमको मोछ दिलाते है   और गुरु भी इस तरह का हो जिसको वास्तव में ब्रह्माण्ड का कुछ ज्ञान हो जो अपने शिष्य का भला कर सके और भटके हुए मार्ग से सही मार्ग पर ला सके ताकि वो अपने जीवन में किसी को दुःख और अत्याचार न करे और और अंत में वो नारायण के धाम को जाये और  उसके साथ =2  उसके बच्चे भी संस्कारी और सत्कारी बने और जग में अपना नाम करे पर आज मेरे को कोई इस तरह का कोई गुरु नहीं रहा जो सही मार्ग पर ले जा सके और  मुझको उपदेश देकर नारायण के धाम पहुचने का रास्ता खोल दे ताकि मेरे हाथो किसी का बुरा न हो और मैं हमेशा सभी के भले के बारे में सोचु और हमने सुना और देखा भी था की भारत ही इक एषा देश था जिसमे संत और महात्मा को किसी भी बस्तु ,रुपयों,या भोग विलास का मोह नही था पर आज के संत -महात्मा की आर्थिक  हालत बहुत मजबूत है संत -महात्मा का अर्थ  होता है की वो सभी मोह को छोड़ कर वन में एक झोपडी बना कर भगवन  का भजन -कीर्तन करे पर आज कल तो संत-महात्मा के पास करोडो -अरवों की सम्पति है उनके पास रहने के लिए एक झोपडी नहीं महल है जिस को देख कर लगता है की ये दूसरा ताज महल है संतो को महल की क्या जरुरत जब रहने के लिए एक कमरा ही काफी  है एक बाबा हुए जिसने बस एक रूपए रोज देने की बात कही एक बाबा ने अपनी कम्पनी ही खोल दी एक ने कहा की मेरे शिष्य ने जिधर पिशाव कर दिया वो जगह मेरी हुई एक नगर में प्रवचन का लाखो रूपये लेते है उनको रुपयों की क्या जरुरत जिसको नारायण ने सब कुछ दिया जिसके लिए इन्सान जगह-2 घूमता है वो उसको दान में मिल चूका है फिर भी वो लगातार रुपयों के पीछे भाग रहा है  सुबह टेलीविजन पर अनेको बाबाओ को देखा जा सकता है क्या आज रुपये ने ही नारायण रूप धारण कर लिया है जो की गुरु हमको उशी के दर्शन करा रहा है यही 7-8 साल पहले हमारे शहर में महात्मा जी का आगमन हुआ तो मेने देखा की सहर की 80% महिलाये अपने हात में 4 रोटी और सब्जी लेकर सडक किनारे खड़ी है जब उनसे पूछा  की ये क्या माजरा  है बोली की बाबा के लिए रोटी लाये है बाबा जिसकी भी रोटी ली सभी मनोकाना पूरी हो जाएगी पर बाबा ए और किसी की भी रोटी नहीं ली और महिलाये उस रोटी को वही डाल कर बाबा के पीछे भाग गयी जिस रोटी से उनकी मनोकामना पूरी हो रही थी वही रोटी उनके पैरो के नीचे कुचल रही है । यदि वो उस  रोटी को किसी को दे दी  तो वो 500 से 600 इन्सान की भूक मिटती पर बाबा तो महान है और उनके शिष्य भी उनसे ज्यादा महान  है बाबा का कहा उनके लिए पत्थर की लकीर है  क्या आज बाबा के प्रकोप इतना बढ़ गया है की पता नहीं अंत में केसा होगा ? आज इन्सान   लगातार भगवान की पूजा में ध्यान दे रहा है उतना ही अत्याचार बढ़ रहा है और बाबाओ का देश को लुठने का कार्यक्रम लगातार बढ़ा रहे है और देश की अर्ध विवस्था को चोट पंहुचा रहे है ।आज यदि सभी बाबाओ की सम्पति को कब्जे में लेकर उसको विकास में लगा दिया जाये तो भारत में बहुत बदलाव आ जायेगा ।  आज हमको जागना होगा और बाबाओ , संत , महात्माओ के चक्कर से निकल कर खुद को पहचानना होगा .

kya yahi hai bharat ????????????????????


रोटी को तरसती निगाहे 
 
नंगा भारत का जीवन 
भारत का भविष्य 
आज इस देश के हालत देख कर रोना आता है और बस दिल करता है कि काश मेरे हाथ में जादू होता तो मैं कुछ इस तरह का करता जिससे सभी खुश रहते क्या भगवान ने भी हमारे साथ मज़ाक किया है की जाओ में तुम को अपने रचे हुए सबसे सुन्दर गृह (पृथ्वी ) पर भेज रहा हूँ जिधर  तुम खुश रहोगे  क्या रब ने धोखा दिया है या अब हमारी नियत ही बदल  गयी है जो की हम बस अपने बारे में सोचते है ये नहीं सोचते की हमारे जैसे  कितने भाई-बहन है जो कई दिनों से भूखे है और हम अपने घर से खाने को सड़क या नाली में डाल देते है जो कोई नहीं खाता यदि हम उसी सामान को किसी को दे तो किसी भाई का पेट भर जायेगा पर आज हम बस अपने बारे में सोचते है न की पड़ोसी के बारे में हम हँसी खुशी रहे दुनिया जा ये भाड़ में हम पर कोई फहराकर नहीं पड़ता `और यही हाल है आज की राजनीति में आने बारे हर इन्सान का आम जनता उसको चुन कर संसद या विधान सभा भेजता है ताकि वो उसको और  उसके नगर का विकास करे पर होता है उसके साथ धोखा जिसको भेजता है वो ही उसको भूल जाता है  और जब कोई उनके पास अपनी फ्हरिह्याद ले कर पहुच  भी जाये तो उसको बोल देते है की  मेरे को बोट नहीं दी थी तूने तो और हो सकता है की नेता जी कुछ सुन्दर से शव्दों का भी प्रयोग करने से नहीं चुकते  क्योकि आज तो वो इस नगर के मुखिया है और मोटी सी रकम पा  रहे और कहते ही जिसके घर में यदि कोई एक बार (M.L.A) या (M.P) हो जाये 7 पुश्त को कामने की जरुरत नहीं है पैदा होते ही तो सभी नेता जी कहना शुरू कर देते है और नेता जी 5 साल तक नगर के मुखिया रहे और हार गए तो उनको कोई फहराक नहीं पड़ता कियो की जो 5 साल पहले बाइक  पर चलता था आज वो फ्होर्चुनर में चलता है जो की 24,00,000/- की आती है पता नहीं नेता जी क्या लोटरी लगी जो की वो 44,000/- की गाड़ी से 24,00,000/- की गाड़ी में पहुच गए काश इस तरह की लोटरी तो नहीं पर इसका 1% ही मिल जाता आम आदमी को तो भूका कोई बचा नहीं सोता नहीं बाल मजदूरी होती आज अन्ना  , केजरिबाल और अन्य सामाजिक संगठन लगातार बोल रहे है की भारत का सारा धन विदेशो में है और लोग अनशन कर रहे है क्या अब अग्रेजो का साम्राज्य है जिसके लिए हमको भूका रहना पड़ता है इन पर कोई फ्हर्क नहीं पड़ता कियोकी जब इनको करोडो लोगो की भूक नहीं दिखी तो आपके और मेरे भूके रहने क्या होगा और आज में देख रहा हूँ की भारत में लक्ष्मी सिर्फ 2 लोगो की हो कर रह गयी है जिसमे सबसे पहले नाम आता है नेता जी का और दूसरा महात्मा का और किसी पास है नहीं इतना रूपया क्या ये भूल गए है की जीवन को काटने के लिए 2 बक्त  की रोटी और दाल की जरूरत होती है न की रूपये - पेसो की और न ही कोई अपनी छाती पर रख कर ले गया है भगवन का एक नियम है की खाली  हाथ भेजूंगा और खाली हाथ ही बुला लूँगा तू चाहे  कितना भी कमा  ले मेरे को कोई फरक  नहीं पड़ता फ्हिर भी इन्सान लगातार धोका और चोरी से नहीं डरता । क्या आने बाले समय में भारत और गरीव होगा या भूका कहलायेगा ??????????????????????????????????????????????????????

सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

रविवार, 21 मार्च 2010

तो सती का नाम क्यों बदनाम ???????????????????



भारत
भी हो रहा है खुले देह व्यापार की मंडी !





भारत सभ्यता , इज्जत ,आश्था और एकता वा
ला देश है इस देश में राम ने अवतार लिया और मर्यादा की लों जलाई और भगवान् में सभी की आस्था को बढाया , जिस देश में सीता ,और सती जैसी स्त्री ने अपने पति को हीअपना भगबान मान कर अपना जीवन ही उसके साथ बिताना उचित समझा , की पति के दूशरे शहर में जाने यादेहांत के बाद किसी और मर्द के पास जाना उचित समझा हो पर अब उस देश की नारी की सोच में बदलाव रहा है वो अब इसका उल्टा ही कर रही है अब भारत में भी स्त्री के भी बहुत मर्द दोस्त होते है जो उनका साथ बसबिस्तर तक देते है और सुबह होते ही किसी और जगह जगह काले जाते है , आज की नारी को अपने योवन कीजलती हुई आग को शांत करने के लिए अनेको मर्दों के साथ सम्पर्क बनती है |

यदि अपने सुना हो की राजा महाराजा के समय में नगर बधू हुआ करती थी जिसको बदलते हुए समाज ने बदले हुए नामो से पुकारा कभी नगर बधू , तबायफ , वैश्या या कहे आज के समाज का दिया हुआ नाम कॉलगर्ल येभी स्त्री है जो की मर्दों की जलती हुई आग को शांत करती है यदि यह इस काम को करती है तो आज की नारी यहकाम कियु कर रही है क्या आज समाज में यही बचा है या आज के समाज की हर नारी नगर बधू बनना चाहती हैयदि हां तो सती का नाम बदनाम
क्यों रही है ?








बुधवार, 4 नवंबर 2009

याद आता है वो गाना " मार गयी मुझे तेरी जुदाई "


किशोर कुमार और आशा भोसले की आवाज में गाया गया वो गाना " मार गयी मुझे तेरी जुदाई " गाने के वो स्वर याद आते है पर आज का किशोर कुमार और आशा भोसले यह गाना नहीं गायेगे अब यह दोनों गायक गायेगे कि " मार गयी मुझे ये महगाई " अब हर कोई वोलेगा और कहता रहेगा कि केंद्र सरकार को अपना काम बंद करके बस रूपया के ध्यान में लग जाना चाहिए कि किसके हाथ कितना लगा और कौन खाली रह गया बस रूपया ही बटोरने में लगे है खद्दर धारी धोती कुरता पहन कर बन बन गए नेताजी और बैठ कर चलाने लगे १०० करोड़ से ज्यादा आबादी बाले देश को और करने लग जाते है भारत की जनता के भविष्य का फैसला और कर दिया देश को परदेशियों के हवाले मुझको याद आ रहे है वो दिन जब गाँधी जी ने स्वदेशी आन्दोलन जो बंगाल में १९०५ में चलाया था जिसमे उन्होंने विदेशी सामान का उपयोग करने से मना किया था और स्वदेशी सामान को अपनाने के लिए आवाज उठाई थी | तब पूरा देश एक आवाज में उनके साथ चल दिया था तो आज भी हिन्दुस्तानी होने के नाते भारत की जनता एक स्वर में नेताजी के साथ चल देती है , पर वह यह नहीं जानती कि वह जिनको अपना मान रही है जब वो अपनों के ही न हुए तो फिर देश के क्या हो सकते है | वो देश को आगे नहीं और पीछे ले जा रहे है | वह आने वाले भारत के भविष्य को कर्ज की उन जंजीरों में लपेट रहे जिनको तोड़ने में हमारे देश के कितने युवा शहीद हुए और उनकी शहादत के बदले हमको आजादी देकर जाने वाले वो अंग्रेज जाते समय इस देश को दो भागो में कर गए , जो आज तक हर छोटी - छोटी बातो पर लड्ते है और देश के बारे में न सोच कर अपनी नाक ऊपर करने में लगे है तो क्या लगता है , यह देश कितना ऊपर जायेगा ? जिस देश में रूपया ही सवसे बड़ा हो वह देश कभी भी तरक्की नहीं कर सकता | जब तक जनता नहीं जागेगी तब तक हम बस महगाई , अत्याचार , बेरोजगारी और बेबसी का रोना रोते रहेगे और कहते रहेगे " मार गयी मुझे ये महगाई "