मंगलवार, 30 अक्टूबर 2012

BHARAT KE BABA ?????????????????????

हिंदुस्तान हमेशा देवी - देवताओ वाला देश कहा गया है और इस देश के तरह की संस्कृति किसी भी देश में नहीं  मिलती थी और इस देश में आयुर्वेद से जनता का इलाज किया जाता था बेटे का सुबह जागने के बाद सबसे पहला काम हुआ करता था अपने माता -पिता के चरण स्पर्श करना और उनसे आशीर्वाद लेना फिर तेयार होकर विद्यालय  जाना और उधर अपने गुरु की इज्जत  करना ओके उनके दिए हुए उपदेशो का पालन करना और अपने से बड़ो  की इज्जत करना और अपने सभी नियमो का पालन करना और गुरु के बताये हुए आदर्शो को याद रखते हुए अपने जीवन का यापन करना पर  आज तो कुछ और ही नजर आता है अब बेटा सुबह अपने माता -पिता को प्रवचन देता हुआ जगता है और पुरे दिन आवारा गर्दी करता है न तो अपनी और अपनों की इज्जत का ख्याल है और दिन भर जुआ और शराव के नशे में रहता है पता नहीं क्यों अब इतना बदलाव आ रहा है इन्सान में बस इसको तो याद रहता है नशा जो कर रहा है उसका नाश और आज का गुरु भी बदल गया है जो शिक्षा उसको विद्यालय में देनी चाहिये वो नहीं देता और टियुशन के लिए बुला लेता है और अपनी आत्मा को धोखा देता है पर खुश बहुत होता है की इस महीने मेने इतना कमाया क्या शिक्षा अब रुपयों से खरीदी या बेचीं जा सकती है ? यदि हा तो अनपढ़ो की संख्या क्यों ज्यादा है । भारत में कहते है की जिस व्यक्ति का कोई गुरु नहीं है उसका उधार नहीं हो सकता में भी कुछ इस बात से सहमत हूँ पर आज के समय में किसको अपना गुरु बनाये क्योकि गुरु उपदेश देता है जो हमको मोछ दिलाते है   और गुरु भी इस तरह का हो जिसको वास्तव में ब्रह्माण्ड का कुछ ज्ञान हो जो अपने शिष्य का भला कर सके और भटके हुए मार्ग से सही मार्ग पर ला सके ताकि वो अपने जीवन में किसी को दुःख और अत्याचार न करे और और अंत में वो नारायण के धाम को जाये और  उसके साथ =2  उसके बच्चे भी संस्कारी और सत्कारी बने और जग में अपना नाम करे पर आज मेरे को कोई इस तरह का कोई गुरु नहीं रहा जो सही मार्ग पर ले जा सके और  मुझको उपदेश देकर नारायण के धाम पहुचने का रास्ता खोल दे ताकि मेरे हाथो किसी का बुरा न हो और मैं हमेशा सभी के भले के बारे में सोचु और हमने सुना और देखा भी था की भारत ही इक एषा देश था जिसमे संत और महात्मा को किसी भी बस्तु ,रुपयों,या भोग विलास का मोह नही था पर आज के संत -महात्मा की आर्थिक  हालत बहुत मजबूत है संत -महात्मा का अर्थ  होता है की वो सभी मोह को छोड़ कर वन में एक झोपडी बना कर भगवन  का भजन -कीर्तन करे पर आज कल तो संत-महात्मा के पास करोडो -अरवों की सम्पति है उनके पास रहने के लिए एक झोपडी नहीं महल है जिस को देख कर लगता है की ये दूसरा ताज महल है संतो को महल की क्या जरुरत जब रहने के लिए एक कमरा ही काफी  है एक बाबा हुए जिसने बस एक रूपए रोज देने की बात कही एक बाबा ने अपनी कम्पनी ही खोल दी एक ने कहा की मेरे शिष्य ने जिधर पिशाव कर दिया वो जगह मेरी हुई एक नगर में प्रवचन का लाखो रूपये लेते है उनको रुपयों की क्या जरुरत जिसको नारायण ने सब कुछ दिया जिसके लिए इन्सान जगह-2 घूमता है वो उसको दान में मिल चूका है फिर भी वो लगातार रुपयों के पीछे भाग रहा है  सुबह टेलीविजन पर अनेको बाबाओ को देखा जा सकता है क्या आज रुपये ने ही नारायण रूप धारण कर लिया है जो की गुरु हमको उशी के दर्शन करा रहा है यही 7-8 साल पहले हमारे शहर में महात्मा जी का आगमन हुआ तो मेने देखा की सहर की 80% महिलाये अपने हात में 4 रोटी और सब्जी लेकर सडक किनारे खड़ी है जब उनसे पूछा  की ये क्या माजरा  है बोली की बाबा के लिए रोटी लाये है बाबा जिसकी भी रोटी ली सभी मनोकाना पूरी हो जाएगी पर बाबा ए और किसी की भी रोटी नहीं ली और महिलाये उस रोटी को वही डाल कर बाबा के पीछे भाग गयी जिस रोटी से उनकी मनोकामना पूरी हो रही थी वही रोटी उनके पैरो के नीचे कुचल रही है । यदि वो उस  रोटी को किसी को दे दी  तो वो 500 से 600 इन्सान की भूक मिटती पर बाबा तो महान है और उनके शिष्य भी उनसे ज्यादा महान  है बाबा का कहा उनके लिए पत्थर की लकीर है  क्या आज बाबा के प्रकोप इतना बढ़ गया है की पता नहीं अंत में केसा होगा ? आज इन्सान   लगातार भगवान की पूजा में ध्यान दे रहा है उतना ही अत्याचार बढ़ रहा है और बाबाओ का देश को लुठने का कार्यक्रम लगातार बढ़ा रहे है और देश की अर्ध विवस्था को चोट पंहुचा रहे है ।आज यदि सभी बाबाओ की सम्पति को कब्जे में लेकर उसको विकास में लगा दिया जाये तो भारत में बहुत बदलाव आ जायेगा ।  आज हमको जागना होगा और बाबाओ , संत , महात्माओ के चक्कर से निकल कर खुद को पहचानना होगा .